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Sunday, September 3, 2017

Kaṭēhara Rōhila - Sammy Singh Pundir

आदरणीय महेश सिंह कठायत जी अपने कटेहर रोहिल खंड से विस्थापित राजपूतो के निरंतर 400 वर्ष के संघर्ष का जो मार्मिक वर्णन किया है उसके लिए क्षत्रिय समाज आपका ऋणी है नेपाल में निवास के बाद भी आप अपनी जन्म भूमि कर्म भूमि कुमायूं ओर कटेहर को नही भूले आप धन्य है आपने 180 वर्ष पुराना दस्तावेज मूल प्रति प्रस्तुत कर क्षत्रियो को गौरवान्वित किया है आपने कटेहर के रोहिला राजपूतो का क्रमबद्ध इतिहास खोज कर एक अति उत्तम कार्य किया है राजा रणवीर सिंह कटेहर या रोहिला ने सल्तनत को घुटने टेकने पर मजबूर किया और नसीरुद्दीन महमूद बहराम उर्फ चंगेज को हराने का वर्णन कर इतिहास के पन्ने खोल दिये है
भारत का क्षत्रिय समाज आपका स्वागत व धन्यवाद करता है कटेहर के कठायत राजपूत वही हैजिन्होंने काठ गढ़ में सिकंदर को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था सूर्य वन्स की निकुम्भ शाखा के ये सूर्य वंसी राजपूत रावी व व्यास नदी के का ठ में काठ गणराज्य के संस्थापक थे

Respected Mahesh Singh kaṭhāyata ji is a constant of the 400 years of the struggle of displaced rajputs with its kaṭēhara rōhila, the kshatriya society is your debtor in Nepal, even after dwelling in Nepal, you do not have your birth land. You are blessed, you have made a 180-Year-old document to the original per. You have proud rajput. The sort of rajputs is a great job. King Ranveer Singh Kaṭēhara or rohila has forced the empire to kneel. The more naseeruddin mahmood baharāma aka and ghenghis the page of history and open
The Kshatriya Society of India is welcome and thanks to the kaṭēhara rajput in the kaṭēhara, he was forced to kneel down in the he, the sun and the founder of the Kath Rajput, the sun and the diameter.
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